Monday, April 8, 2019

दूध पीने के नियम



दूध पीने के नियम
सुबह के समय दूध कभी ना पीये+ जर्सी गाय के दूध कभी भी ना पीये

बोर्नविटा , होर्लिक्स के विज्ञापनों के चलते माताओं के मन में यह बैठ जाता है की बच्चों को ये सब डाल के दो कप दूध पिला दिया बस हो गया . चाहे बच्चे दूध पसंद करे ना करे , उलटी करे , वे किसी तरह ये पिला के ही दम लेती है . फिर भी बच्चों में केशियम की कमी , लम्बाई ना बढना , इत्यादि समस्याएँ देखने में आती है .आयुर्वेद के अन
ुसार दूध पिने के कुछ नियम है ---
- दोपहर में छाछ पीना चाहिए . दही की प्रकृति गर्म होती है ; जबकि छाछ की ठंडी .
- रात में दूध पीना चाहिए पर बिना शकर के ; हो सके तो गाय का घी १- २ चम्मच दाल के ले . दूध की अपनी प्राकृतिक मिठास होती है वो हम शकर डाल देने के कारण अनुभव ही नहीं कर पाते .
- एक बार बच्चें अन्य भोजन लेना शुरू कर दे जैसे रोटी , चावल , सब्जियां तब उन्हें गेंहूँ , चावल और सब्जियों में मौजूद केल्शियम प्राप्त होने लगता है . अब वे केल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं .
- बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे नहीं हो सकते . इनके लुभावने विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए . बच्चों को खूब चने , दाने , सत्तू , मिक्स्ड आटे के लड्डू खिलाइए
- प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले .
- जर्सी या दोगली गाय से भैंस का दूध बेहतर है .
- दही अगर खट्टा हो गया हो तो भी दूध और दही ना मिलाये , खीर और कढ़ी एक साथ ना खाए . खीर के साथ नामकी पदार्थ ना खाए .
- अधजमे दही का सेवन ना करे .
- चावल में दूध के साथ नमक ना डाले .
- सूप में ,आटा भिगोने के लिए , दूध इस्तेमाल ना करे .
- द्विदल यानी की दालों के साथ दही का सेवन विरुद्ध आहार माना जाता है . अगर करना ही पड़े तो दही को हिंग जीरा की बघार दे कर उसकी प्रकृति बदल लें .
- रात में दही या छाछ का सेवन ना करे .
पूरा पोस्ट नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=Nc6ws1ZA5s0

हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !

मित्रो कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं !(Contraceptive)
कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं !
जैसे norplant, depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !

और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है ! ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन भारत मे लाकर बेच रही हैं !

जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधन के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं !

ये injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है !

कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और Depoprovera का Injection लगा दिया ! जिससे उनको Cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई!

इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है ! Steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !

इसकी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है ! फिर एक यू क ले फ नाम की एक है फिर एक Norplant है ! फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं ! उससे uterus की मांस पेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है ! और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई मताए बहने बिहोश हो जाती है ! लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये contraceptive दिया गया जिसके कारण से ये हुआ है ! और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !
आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !
मित्रो पूरी post नहीं पढ़ सकते यहाँ click करे !
https://www.youtube.com/watch?v=gm8zznEVVQw

दही खाने के फायदे

दही खाने के फायदे 


1. दही के सेवन से हार्ट में होने वाले कोरोनरी आर्टरी रोग से बचाव किया जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि दही के नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है।

2. चेहरे पर दही लगाने से त्वचा मुलायम होने के साथ उसमें निखार भी आता है। अगर दही से चेहरे की मसाज की जाए तो यह ब्लीच के जैसा काम करता है। इसका प्रयोग बालों में कंडीशनर के तौर पर भी किया जाता है।

3. गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न हो जाने पर दही मलने से राहत मिलती है।

4. दही दूध के मुकाबले सौ गुना बेहतर है, क्‍योंकि इसमें कैल्शियम के चलते हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी से लड़ने में भी मददगार है।

5. हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को रोजाना दही का सेवन करना चाहिए।


6. दही में अजवायन डालकर खाने से कब्ज दूर होता है।
7. दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है। मुंहासे दूर होते हैं।

8. दही को आटे के चोकर में मिलाकर लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है और त्वचा कातिमय बनती है। - सिर में रूसी होने पर भी दही फायदेमंद होता है। ये रूसी को हटाकर बालों को मुलायम बनाता है।

केले का पत्ता तथा प्रकृति के साथ मित्रता


केले का पत्ता तथा प्रकृति के साथ मित्रता
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हम जानते हैं केले का पत्ता देखते ही हमे दक्षिण भारत का स्मरण हो जाता है, जहां आज भी केले के पत्ते पर भोजन करने की परम्परा है, बात भी सही है, वहां पर केले के वृक्ष बहुतायत में प्राप्त होते हैं l
मैं आज यह विषय आप सबके समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूँ, की जब हम भोजन खाकर झूठे बर्तन होदी में रखते हैं उसे साफ़ करने वाले को कितना बुरा लगता होगा, और उसको साफ़ करने में कितना सारा सर्फ, डिटर्जेंट और पानी का दुरूपयोग किया जाता है l

यहाँ पर एक बात विचारणीय है कि पूरी पृथ्वी के जल का केवल 1% ही मनुष्यों के पीने योग्य है, क्या हम इस अमूल्य प्राकृतिक पेय जल को नष्ट करना उचित है ?

सर्फ, डिटर्जेंट में खतरनाक केमिकल होते हैं, भले हम अच्छे से बर्तन धो भी लें, तो भी इस केमिकल की एक परत उस बर्तन पर अवश्य जमी रहती है, आगे जाकर उसमे भोजन रख कर आप जब खाते हैं, तब वो हमारे शरीर को हानि पहुंचाती है l

दूसरी बात यह है कि हम अपना झूठा किसी और से धुलवा रहे हैं जो कि अच्छी बात नही है, आजकल घरों में यह कार्य कामवाली बाइयां करती हैं, आप अपना खर्च बढ़ा रहे हो, पानी भी व्यर्थ कर रहे हो, केमिकल खाकर शरीर भी खराब कर रहे हो और कामवाली बाई को दुःख भी दे रहे हो l

क्यों न हम सनातन संस्कृति के अनुसार प्राचीन परम्पराओं की और लौटें, केले के पत्ते पर खाएं या वत वृक्ष के पत्तों के पत्तल पर भोजन किया करें l

इसके लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है l

2. न पानी नष्ट होगा l

3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा l

4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l

5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी l

6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी l

7. प्रदूषण भी घटेगा

8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है l

9. पत्तल बनाए वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा l

10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा
सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा l जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है l

मैं आपको एक व्यक्तिगत अनुभव बता रहा हूँ, मैं सितम्बर माह में चेन्नई में गया था, वहां पर मैं 3 दिन रहा, उस कार्यक्रम में लगभग 5000 लोगों ने तीन दिनों तक तीनो समय भोजन किया, अर्थात 3 दिन में 45000 लोगों ने भोजन किया l

इन 45000 लोगों ने पत्तल पर भोजन किया, सोचिये 3 दिन में इन्होने कितना पानी बचाया बर्तन धोने में जो व्यर्थ होना था, 45000 बर्तन धोने में कितना पानी व्यर्थ होना था, जो की सारा बच गया l और चेन्नई की नदियों में कितना प्रदूषित पानी जमा होने से बचाया गया l

आप भारत की जनसंख्या के अनुसार स्वयम सोचिये एवं विश्लेषण कीजिए कि कितना पानी प्रतिदिन हम अपनी नदियों में इसी प्रकार दूषित करके छोड़ते हैं, कितने गैलन पानी हम प्रतिदिन अपनी नदियों को दूषित बनाने हेतु दुरूपयोग करते हैं l हमारी जनसंख्या द्वारा अपनाई जा रही इन लापरवाहियों का खामियाजा आगे जाकर हमारी पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा l
आप अपने बच्चों का ध्यान रखते हैं... अपनी पीढ़ियों का ध्यान क्यों नहीं रखना चाहते ?

यदि हो सके तो बाजार से पत्तल खरीदें, जिनके पास जगह हो वो अपने घर में एक केले का पेड़ लगा लें, फिर सोचिये आप इस सृष्टि के प्रति कितना सहयोग कर सकते हैं l

प्रतिदिन उन झूठी पत्तलों को कूड़ेदान में डाल दें, नगर निगम की गाड़ी आकर ले जाएगी या फिर अपने घर के पीछे ही कोई गड्ढा करके उसमे गाड़ दें l
आप इन महत्वपूर्ण बातों को समझ कर यदि अमल में लायेंगे तो आप वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण एवंम मिटटी की उर्वरकता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभा सकते हैं l

ऐसे बहुत से बुद्धिजीवी हैं जो इनसे भी बेहतर लाभ गिनवा सकते हैं, उन सबका साधुवाद है, वे और भी लाभ गिनवाएं और समाधान उपलब्ध करवाएं तो बहुत अच्छा रहेगा, आसपास के समाज को जागरूक करवाने का प्रयास करें l

कई विषयों पर हमारा संकोच ही हमारे, पतन और विनाश का कारण बन रहा है, हम हानि भी न करें, और प्रकृति को भी हानि न पहुंचाएं l
आइये लौटें अपनी सनातन संस्कृति की और जिसका ध्येय केवल मानव और प्रकृति का विकास है l —

गहरी नींद के आसान उपाय


गहरी नींद के आसान उपाय

* रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट
धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने
की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के
अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।

* अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल
से धोकर बिस्तर पर जाना जाहिए। इससे नींद आने
में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह
कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग
नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह
आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।

* सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले
दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें।
सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के
बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है,
जिस कारण नींद नहीं आती।

* अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में
आपको सोने में आराम महसूस होता हो,
उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें।
अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट
बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है।

* अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है,
नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है
तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर
शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त
शवासन करें। इससे पूरे शरीर
की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण
आसानी से नींद आ जाती है।

* अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार
होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के
अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने
को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर
एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है,
तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस
कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है।
************************************** * सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक
पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क
की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं,
जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।

काले बर्तन या काला ज़हर - जानिए इनसे होने वाली बीमारियां

काले बर्तन या काला ज़हर….....जानिए इनसे होने वाली बीमारियां
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टेफलोन शीट तो याद होगी सबको कैसे याद नहीं होगी आजकल दिन की शुरुवात ही उससे होती है चाय बनानी है तो नॉन स्टिक तपेली (पतीली), तवा, फ्राई पेन, ना जाने कितने ही बर्तन हमारे घर में है जो टेफलोन कोटिंग वाले हैं फास्ट टू कुक इजी टू क्लीन वाली छवि वाले ये बर्तन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए है, जब ये लिख रही हू तो दादी नानी वाला ज़माना याद आ जाता है जब चमकते हुए बर्तन स्टेंडर्ड की निशानी माने जाते थे आजकल उनकी जगह काले बर्तनों ने ले ली.

हम सब इन बर्तनों को अपने घर में उपयोग में लेते आए है और शायद कोई बहुत बेहतर विकल्प ना मिल जाने तक आगे भी उपयोग करते रहेंगे पर, इनका उपयोग करते समय हम ये बात भूल जाते है की ये हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचा सकते है या हम में से कई लोग ये बात जानते भी नहीं की सच में ऐसा कुछ हो सकता है कि ये बर्तन हमारी बीमारियाँ बढ़ा सकते है या हमारे अपनों को तकलीफ दे सकते है और हमारे पक्षियों की जान भी ले सकते है.
चौंकिए मत ये सच है. हालाँकि टेफलोन को 20 वी शताब्दी की सबसे बेहतरीन केमिकल खोज में से एक माना गया है स्पेस सुइट और पाइप में इसका प्रयोग उर्जा रोधी के रूप में किया जाने लगा पर ये भी एक बड़ा सच है की ये स्वास्थ के लिए हानिकारक है इसके हानिकारक प्रभाव जन्मजात बिमारियों ,सांस की बीमारी जेसी कई बिमारियों के रूप में देखे जा सकते हैं.

ये भी सच है की जब टेफलोन कोटेड बर्तन को अधिक गर्म किया जाता है तो पक्षियों की जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है कुछ ही समय पहले 14 पक्षी तब मारे गए जब टेफलोन के बर्तन को पहले से गरम किया गया और तेज आंच पर खाना बनाया गया, ये पूरी घटना होने में सिर्फ 15 मिनिट लगे.
टेफलोन कोटेड बर्तनों में सिर्फ 5 मिनिट में 721 डिग्री टेम्प्रेचर तक गर्म हो जाने की प्रवृति देखी गई है और इसी दोरान 6 तरह की गैस वातावरण में फैलती है इनमे से 2 एसी गैस होती है जो केंसर को जन्म दे सकती है. अध्ययन बताते हैं कि टेफलोन को अधिक गर्म करने से टेफलोन टोक्सिकोसिस (पक्षियों के मामले में ) और पोलिमर फ्यूम फीवर ( इंसानों के मामले में ) की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है .


टेफलोन केमिकल के शरीर में जाने से होने वाली बीमारियाँ:

1 . पुरुष इनफर्टिलिटी : हाल ही में किए गए एक डच अध्यन में ये बात सामने आई है लम्बे समय तक टेफलोन केमिकल के शरीर में जाने से पुरुष इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है और इससे सम्बंधित कई बीमारियाँ पुरुषों में देखी जा सकती है.
२. थायराइड : हाल ही में एक अमेरिकन एजेंसी द्वारा किया गए अध्यन में ये बात सामने आई क2 टेफलोन की मात्र लगातार शरीर में जाने से थायराइड ग्रंथि सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है.
3. बच्चे को जन्म देने में समस्या : केलिफोर्निया में हुई एक स्टडी में ये पाया गया की जिन महिलाओं के शरीर में जल ,वायु या भोजन किसी भी माध्यम से पी ऍफ़ ओ (टेफलोन) की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई उन्हें बच्चो को जन्म देते समय अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा इसी के साथ उनमे बच्चो को जन्म देने की शमता भी अपेक्षाकृत कम पाई गई.
4 . केंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा : एक प्रयोग के दौरान जब चूहों को पी ऍफ़ ओ के इंजेक्शन लगाए गए तो उनमे ब्रेन ट्यूमर विकसित हो गया साथ ही केंसर के लक्षण भी दिखाई देने लगे. पी ऍफ़ ओ जब एक बार शरीर के अन्दर चला जाता है तो लगभग 4 साल तक शरीर में बना रहता है जो एक बड़ा खतरा हो सकता है .
5. शारीरिक समस्याएं व अन्य बीमारियाँ : पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा शरीर में पाई जाने वाली महिलाओं के बच्चो पर भी इसका असर जन्मजात शारीरिक समस्याओं के रूप में देखा गया है इसीस के साथ अद्द्याँ में ये सामने आया है की पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा लीवर केंसर का खतरा बढ़ा देती है .

बर्तन सिर्फ़ मिट्टी या पीतल के ही उत्तम है,
स्टील और एलुमिनियम जहर है

चिकनगुनिया नाम की बीमारी

मित्रो कुछ दिनो पहले चिकनगुनिया नाम की बीमारी बहुत तेजी से अपने देश मे फैली !! लाखो की संख्या मे लोग इससे प्रभावित हुये ! और हजारो लोग मरे ! हमेशा की तरह सरकार के हाथ खड़े रहे !

श्री राजीव दीक्षित जी ने 6 महीने गाँव -गाँव घूम-घूम कर आयुर्वेदिक दवा से सैंकड़ों लोगो को बचाया !!और ये दवा बनानी कितनी आसान है !

तुलसी का काढ़ा पी लो !

नीम की गिलोय होती है उसको भी उसमे डाल लो !

थोड़ी सोंठ(सुखी अदरक) डाल लो !

थोड़ी छोटी पीपर डाल लो !

और अंत थोड़ा गुड मिला लो ! क्यूंकि ज्यादा कड़वा हो जाता है तो कई बार पिया नहीं जाता !

मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने हजारो लोगो का चिकनगुनिया पूरा खत्म कर दिया !!
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और जो ये एलोपेथी वाले ने किया ! Boveron के 3 -3 इंजेक्शन ठोक दो ! diclofenac दे दो !
Paracetamol भी दे दो ! जो इनके पास है सब मरीज को ठोक दिया ! और लोग 20 -20 दिन से बिस्तर मे पड़े तड़पते रहे !!

और कुछ डाक्टर जिनको खुद चिकनगुनिया हो गया ! राजीव भाई के पास आए और बोलो कुछ बता दो ! राजीव भाई ने कहा अपना इंजेक्शन खुद क्यूँ नहीं ठोक लेते ! तो उन्होने ने कहा हमे मालूम है इसके side effects क्या हैं !

तो राजीव भाई ने कहा मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???
क्या इतने हरामखोर हो ??

तुम जानते हो Boveron लगाएंगे मुंह मे छाले हो जाएँगे ! गले मे छालें हो जाएँगे ! अल्सर होने की भी संभावना है ! ये सब तुम जानते हो तो मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???

ये हरामखोरी तुम मे कहाँ से आ गई ??

अपने को ये सब इंजेक्शन लगाओ नहीं ! और मरीज को ठोकते जाओ ठोकते जाओ ! और तुमके मालूम है मरीज इससे ठीक होने वाला नहीं ! फिर Paracetamol दे दो फिर novalgin दे दो !

और दुर्भाग्य से ये सारी दवाएं यूरोप के देशों मे पीछले 20 -20 से बंद है ! वो कहते है diclofenac खराब है !Paracetamol तो जहर है ! novaljin तो 1984 से बैन हैं अमेरिका मे ! और वही इंजेक्शन ठोक रहें बार बार ! और मरीज जो है ठीक ही नहीं हो रहा !!

राजीव भाई बताते है होमेओपेथी की तो बहुत सी दवा तो आयुर्वेद से हीं गाई ! आप मे से कुछ होमेओपेथी डाक्टर होंगे तो वो जानते होंगे ! तुलसी से ही ocimum बनी हैं ! तो ocimum की तीन तीन खुराक देकर राजीव भाई ने कर्नाटक राज्य मे 70 हजार लोगो को चलता कर दिया ! और वो 20 -20 दिन से एलोपेथी खा रहे थे result नहीं आ रहा था ! बुखार रुक नहीं रहा था उल्टी पे उल्टी हो रही थी ! नींद आ नहीं रही थी और ocimum 200 की तीन तीन खुराक से
सब ठीक कर दिया !

और अंत कर्नाटक राज्य की सरकार ने इसके परिणाम देख अपने सारे डाएरेक्टर,जोयन डेरेक्टर ! लगा दिये कि जाओ देखो ये राजीव दीक्षित क्या दे रहा है !

राजीव भाई 70 हजार लोगो को दवा दी सिर्फ 6 मरे ! औए उन्होने 1 लाख 22 हजार लोगो की दी मुश्किल से 6 बचे !! ये कर्नाटक का हाल था ! राजीव भाई बोले मेरी मजबूरी ये थी की कार्यकर्ता कम पढ़ गए ! अगर 1 -2 हजार डाक्टरों की टीम साथ होती ! तो हम कर्नाटक के उन लाखो लोगो को बचा लेते जो मर गए !

तो मित्रो ये तुलसी ,नीम सोंठ ,पीपर सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं ! इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं ! और अगर पूरे शहर या गाँव मे फैल जाये ! एक एक को काढ़ा पिलाना मुश्किल हो तो होमेओपेथी की ocimum 200 की दो दो बुँदे 3 -3 बार मरीजो को दीजिये !!
उनका अनमोल जीवन और पैसा बचाइए !

पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click कर देखें !
https://www.youtube.com/watch?v=PmQnBJbq5X8

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